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लेखनी प्रतियोगिता -21-Mar-2022 हुस्न की चांदनी

मुक्तक 

नशीले मस्त दो नैनों में दिल कहीं खो गया है 
काली नागिन सी जुल्फों में बस के सो गया है 
शोख अदाओं ने छीन लिया है चैन ओ सुकून 
कातिल मुस्कान से घायल होके तेरा हो गया है 

चमचमाते हुस्न की एक किरण हमें भी दे दो 
मदभरी मय की मस्ती के कतरे हमें भी दे दो 
सुर्ख लबों से चुराके दे दो लाली की चंद लकीरें 
महकते बदन से बस एक मुठ्ठी खुशबू ही दे दो 

ख्वाबों में आ आकर रोज इतना क्यों सताते हो 
ये कैसा इश्क है जिसे सिर्फ आंखों से जताते हो 
कभी दिल की महफिल में सामने बैठकर देखो 
अब तो थाम लो हाथ मेरा इतना क्यों तरसाते हो 

हरिशंकर गोयल "हरि"
21.3.22 

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14 Comments

Punam verma

22-Mar-2022 09:28 PM

Very nice

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Hari Shanker Goyal "Hari"

22-Mar-2022 10:19 PM

💐💐🙏🙏

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Shrishti pandey

22-Mar-2022 09:19 AM

Very nice

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Hari Shanker Goyal "Hari"

22-Mar-2022 05:50 PM

आभार मैम

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Abhinav ji

22-Mar-2022 08:55 AM

Nice 👍

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Hari Shanker Goyal "Hari"

22-Mar-2022 05:50 PM

आभार आदरणीय

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